न पकड़ो, उड़ान भरने दो मुझे
भागते तो होंगे सभी, भागने दो उन्हें
भरनी है उड़ान, उड़ने दो मुझे
कुछ तो अलग होता है सब में,
कुछ तो अलग मुझ में भी है।
करू गर वैसा जैसे करते हैं सब
फिर कैसे पहचानूंगी खुद को मै?
....कौन हूँ मैं?
थोड़ वक्त लम्बा हो गया है...
तो क्या...
वक्त लेना क्या गुनाह हैं??
अब मत पूछो मुझसे कि क्या करना है मुझे,
गुजर गया वक्त जब बताना था मुझे।
करने दो मन का मुझे,
हार भी जाऊंगी तो गम न रहेगा
कम से कम मन का तो करूंगी मैं
याद रखना, गर पैर छीन ले कुदरत
तो भी मन तो उड़ान भरता है।
न कहना मुझसे अब कुछ भी
बस अब उड़ान भरने दो मुझे...
अब उड़ान भरने दो मुझे।
भागते तो होंगे सभी, भागने दो उन्हें
भरनी है उड़ान, उड़ने दो मुझे
कुछ तो अलग होता है सब में,
कुछ तो अलग मुझ में भी है।
करू गर वैसा जैसे करते हैं सब
फिर कैसे पहचानूंगी खुद को मै?
....कौन हूँ मैं?
थोड़ वक्त लम्बा हो गया है...
तो क्या...
वक्त लेना क्या गुनाह हैं??
अब मत पूछो मुझसे कि क्या करना है मुझे,
गुजर गया वक्त जब बताना था मुझे।
करने दो मन का मुझे,
हार भी जाऊंगी तो गम न रहेगा
कम से कम मन का तो करूंगी मैं
याद रखना, गर पैर छीन ले कुदरत
तो भी मन तो उड़ान भरता है।
न कहना मुझसे अब कुछ भी
बस अब उड़ान भरने दो मुझे...
अब उड़ान भरने दो मुझे।
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