Thursday, 23 July 2020

न मुकम्मल....

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कुछ अधूरी सी शाम....
कुछ अधूरी सी रातें.....
मुकम्मल तो वो सुबह भी न थी....
जब तुम कुछ न बोले।
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Tuesday, 5 May 2020

            




           खामोशियों से डर लगता है मुझे....

           अब मैं खुद से ही बातें कर लेती हूँ।