कितने चंचल और शरारती हैं ये बच्चे ,नालायक हैं एकदम। गर्मियों की छुट्टियां और इनकी उच्चश्रंखलता................ऊपर वाला बचाये।
जैसे ही देखा किसी को आते हुए भागना शुरू कर देते हैं, बिना किसी लक्ष्य के।
क्या कोई नुक-सुक लड़की , क्या कोई मूंछो पर ताव देने वाला, क्या कोई लाठी लिए इंसान……………… किसी को नही छोड़ते। सब बचना चाहते हैं इनसे।
विभिन्न रंगों से सराबोर इनकी अपनी अलग दुनिया है, अपनी एक अलग भाषा ( हमारी सामान्य भाषा से अलग, शायद किसी से साझा नही करना चाहते। )
इनसे आप इनकी मम्मियों के बारे में पूछें जरा, मजाल जो एक शब्द भी अपने मुँह से निकाले …………………टुकुर -टुकुर देखते अवश्य रहेंगे।
कार्यदिवस में कम से कम घर में रहना होता है, सुबह उठो दैनिक कार्य निपटाओ और ऑफिस के लिए निकल जाओ , शाम को थकहारे लौट कर आओ तो तो खाना बनाओ -खाओ -सो जाओ।
इतने कम समय में इतने सारे काम और सोना भी होता है …………… इन बच्चों से उलझने का समय ही नहीं होता , और यदि ये कोशिश करें तो साफ़ बचकर निकलने में ही भलाई है……………। परन्तु इस सबसे इतर कभी-कभी ये बहुत आफत कर देते हैं…………………आपको प्रातः वाशरूम प्रयोग करना रहता है, और ये कब पहले ही जागकर आपसे पूर्व ही वहाँ प्रकट हैं ये आपको मालूम ही नही होगा............. अब कीजिये प्रतीक्षा इनके बाहर आने कि……………निःसंदेह कुछ दिलेर भी हैं जो निपट लेते हैं इनसे।
अब आप निवृत्त होकर रसोई घर का रुख करना चाहेंगे , तो ये बच्चे वहाँ भी किसी कोने में छुपे मिलेंगे।
क्या कोई मोर-पंख और क्या कोई अंडे के छिलके इनके के मन में डर की लहर पैदा कर सके , इक्कीसवीं सदी की पैदाइश हैं ये !!!.....................
इनसे आप इनकी मम्मियों के बारे में पूछें जरा, मजाल जो एक शब्द भी अपने मुँह से निकाले …………………टुकुर -टुकुर देखते अवश्य रहेंगे।
कार्यदिवस में कम से कम घर में रहना होता है, सुबह उठो दैनिक कार्य निपटाओ और ऑफिस के लिए निकल जाओ , शाम को थकहारे लौट कर आओ तो तो खाना बनाओ -खाओ -सो जाओ।
इतने कम समय में इतने सारे काम और सोना भी होता है …………… इन बच्चों से उलझने का समय ही नहीं होता , और यदि ये कोशिश करें तो साफ़ बचकर निकलने में ही भलाई है……………। परन्तु इस सबसे इतर कभी-कभी ये बहुत आफत कर देते हैं…………………आपको प्रातः वाशरूम प्रयोग करना रहता है, और ये कब पहले ही जागकर आपसे पूर्व ही वहाँ प्रकट हैं ये आपको मालूम ही नही होगा............. अब कीजिये प्रतीक्षा इनके बाहर आने कि……………निःसंदेह कुछ दिलेर भी हैं जो निपट लेते हैं इनसे।
अब आप निवृत्त होकर रसोई घर का रुख करना चाहेंगे , तो ये बच्चे वहाँ भी किसी कोने में छुपे मिलेंगे।
क्या कोई मोर-पंख और क्या कोई अंडे के छिलके इनके के मन में डर की लहर पैदा कर सके , इक्कीसवीं सदी की पैदाइश हैं ये !!!.....................
सार यह है कि कोई भी उपाय कीजिये, इनसे छुटकारा नही मिल सकता।
वैसे मैंने एक अलग बात नोटिस की है इनमें………………कि ये देखने में, शारीरिक बनावट में बड़े ही भिन्न हैं। इनकी दोनों आँखों के पीछे एक-एक छिद्र है जिसमे से आप आर-पार देख सकते हैं....................... सम्भवतः ये इनकी श्रवणेन्द्री हों। ……………जी हाँ श्रवणेन्द्री !!!
यकीन न आये तो किसी परिपक्व में आसानी से देख सकते हैं आप................. तो ढूंढिए जरा किसी छिपकली को।
वैसे मैंने एक अलग बात नोटिस की है इनमें………………कि ये देखने में, शारीरिक बनावट में बड़े ही भिन्न हैं। इनकी दोनों आँखों के पीछे एक-एक छिद्र है जिसमे से आप आर-पार देख सकते हैं....................... सम्भवतः ये इनकी श्रवणेन्द्री हों। ……………जी हाँ श्रवणेन्द्री !!!
यकीन न आये तो किसी परिपक्व में आसानी से देख सकते हैं आप................. तो ढूंढिए जरा किसी छिपकली को।

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